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Endometriosis in Hindi

एंडोमेट्रियोसिस क्या होता है?

एंडोमेट्रियोसिस तब होता है जब आपके गर्भाशय की भीतरी परत के समान ऊतक आपके शरीर में कहीं और पाया जाता है, आमतौर पर आपके श्रोणि में आपके गर्भाशय, अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब के आसपास।

एंडोमेट्रियोसिस का सरल अर्थ

एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की परत के समान ऊतक उन जगहों पर बढ़ने लगते हैं जहाँ उन्हें नहीं होना चाहिए। इससे श्रोणि में दर्द, भारी मासिक धर्म और प्रजनन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

यह समस्या शरीर में कैसे विकसित होती है

गर्भाशय तीन परतों से बना होता है: अंतःगर्भाशय, मायोमेट्रियम और परिधीय। सबसे भीतरी परत को अंतःगर्भाशय कहते हैं। फैलोपियन ट्यूब में अंडाणु के निषेचित होने के बाद, बनने वाला भ्रूण अंतःगर्भाशय में विकसित होता है। अंतःगर्भाशय की परत गर्भावस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसके लिए, प्रत्येक मासिक धर्म चक्र में अंतःगर्भाशय की परत बनती है। जब गर्भावस्था नहीं होती है, तो यह परत मासिक धर्म के दौरान रक्तस्राव के साथ टुकड़ों (थक्कों) के रूप में बाहर निकल जाती है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकीन मासिक धर्म का रक्तस्राव कभी-कभी फैलोपियन ट्यूब के माध्यम से पेट में रिस जाता है। इसके साथ ही, गर्भाशय से निशान ऊतक बाहर निकल आते हैं। इसे प्रतिगामी मासिक धर्म कहते हैं। ये ऊतक वहां बढ़ने लगते हैं। संक्षेप में, अंतःगर्भाशय के ऊतक गर्भाशय के बाहर अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब और श्रोणि में बढ़ने लगते हैं।

एंडोमेट्रियोसिस होने के कारण

हार्मोनल असंतुलन

एस्ट्रोजन हार्मोन गर्भाशय के अंदर और बाहर दोनों जगह एंडोमेट्रियल ऊतक के विकास को बढ़ावा देता है। 

मासिक धर्म से जुड़ी गड़बड़ी

  • मासिक धर्म के दौरान रक्त वापसी : इस प्रक्रिया में, गर्भाशय की कोशिकाओं से युक्त मासिक धर्म का रक्त शरीर से बाहर निकलने के बजाय श्रोणि गुहा में वापस आ जाता है। परिणामस्वरूप, ये कोशिकाएं श्रोणि अंगों की दीवारों और सतहों से चिपक जाती हैं, जहां कोशिकाएं बढ़ती और मोटी होती हैं, और प्रत्येक मासिक धर्म चक्र के दौरान रक्तस्राव होता है।

आनुवंशिक या पारिवारिक कारण

एंडोमेट्रियोसिस को कभी-कभी आनुवंशिक माना जाता है, जिसका अर्थ है कि यह परिवारों में पीढ़ी दर पीढ़ी चलता है। 

ब्रेन ट्यूमर, स्ट्रोक या इंफेक्शन

दौरे पड़ने का कारण स्ट्रोक, ट्यूमर या मस्तिष्क को प्रभावित करने वाले संक्रमण जैसी स्थितियां हो सकती हैं।

आनुवंशिक (Genetic) कारण

दौरे पड़ने का कारण स्ट्रोक, ट्यूमर या मस्तिष्क को प्रभावित करने वाले संक्रमण जैसी स्थितियां हो सकती हैं।

मिर्गी के अलग-अलग प्रकार

फोकल (Focal) सीज़र

फोकल सीज़र दिमाग के किसी एक हिस्से से शुरू होते हैं। इस दौरान मरीज पूरी तरह होश में भी रह सकता है या कुछ समय के लिए भ्रमित हो सकता है। इस प्रकार के सीज़र में हाथ या पैर का झटका लगना, अजीब सी गंध महसूस होना, अचानक डर या बेचैनी होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कई बार मरीज को दौरा पड़ने के बाद याद भी नहीं रहता कि क्या हुआ था।

जनरलाइज्ड सीज़र

जनरलाइज्ड सीज़र दिमाग के दोनों हिस्सों को एक साथ प्रभावित करते हैं। इस प्रकार के दौरे में व्यक्ति आमतौर पर बेहोश हो जाता है और शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है। यह सीज़र बच्चों और बड़ों दोनों में हो सकता है और इसकी तीव्रता अलग-अलग हो सकती है। सही समय पर इलाज न मिले तो यह जीवन को प्रभावित कर सकता है।

एब्सेंस (Absence) सीज़र

एब्सेंस सीज़र ज्यादातर बच्चों में देखने को मिलता है। इसमें बच्चा कुछ सेकंड के लिए एकदम खाली नजरों से देखने लगता है, जैसे वह आसपास की दुनिया से कट गया हो। अक्सर इसे लोग ध्यान की कमी या आदत समझ लेते हैं, लेकिन बार-बार ऐसा होना मिर्गी का संकेत हो सकता है। इस प्रकार के सीज़र में आमतौर पर गिरना या झटके नहीं आते।

टॉनिक-क्लॉनिक सीज़र

टॉनिक-क्लॉनिक सीज़र मिर्गी का सबसे गंभीर और पहचानने में आसान प्रकार माना जाता है। इसमें पहले शरीर अकड़ जाता है (टॉनिक अवस्था) और फिर तेज झटके लगने लगते हैं (क्लॉनिक अवस्था)। इस दौरान मरीज बेहोश हो जाता है, मुंह से झाग आ सकता है और बाद में बहुत ज्यादा थकान महसूस होती है। ऐसे सीज़र में तुरंत मेडिकल मदद बहुत जरूरी होती है।

मिर्गी के लक्षण कैसे पहचानें?

अचानक गिरना या बेहोश होना

कई लोगों में दौरा अचानक आता है। व्यक्ति बिना किसी चेतावनी के ज़मीन पर गिर सकता है या कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनटों तक बेहोश हो सकता है।

हाथ-पैरों में तेज झटके

मिर्गी के दौरे के दौरान हाथ और पैरों में तेज़, अनियंत्रित झटके लग सकते हैं। यह सबसे आम और आसानी से पहचाने जाने वाला लक्षण है।

आंखें घूरना या पलटना

दौरे के समय व्यक्ति की आंखें एक जगह स्थिर होकर घूरने लगती हैं या ऊपर की ओर पलट जाती हैं। कई बार आसपास की चीज़ों पर उसका ध्यान नहीं रहता।

बोलने या समझने में परेशानी

कुछ मामलों में व्यक्ति बोल नहीं पाता या कही गई बातों को समझने में कठिनाई महसूस करता है। यह स्थिति कुछ समय के लिए ही होती है।

दौरे के बाद थकान और भ्रम

दौरा खत्म होने के बाद व्यक्ति को बहुत ज़्यादा थकान, सिर भारी लगना या कुछ देर तक भ्रम की स्थिति रह सकती है। कई बार उसे याद भी नहीं रहता कि दौरा कैसे पड़ा।

मिर्गी की सही पहचान कैसे होती है?

मरीज की मेडिकल हिस्ट्री

रोगी के लक्षणों, दौरे की आवृत्ति, कारणों और किसी भी संभावित अंतर्निहित स्थिति या दौरे के पारिवारिक इतिहास को समझने के लिए एक विस्तृत चिकित्सा इतिहास लिया जाता है।

हर्निया सर्जरी

तंत्रिका संबंधी परीक्षण में किसी भी तंत्रिका संबंधी असामान्यता की पहचान करने के लिए गति क्षमता, संवेदी कार्य, प्रतिवर्त और संज्ञानात्मक कार्य का मूल्यांकन किया जाता है।

EEG टेस्ट की भूमिका

यह परीक्षण मस्तिष्क में विद्युत गतिविधि को रिकॉर्ड करता है। यह असामान्य मस्तिष्क गतिविधि या दौरे के दौरान होने वाले सामान्य पैटर्न का पता लगाने में मदद करता है, जिससे मिर्गी के निदान में सहायता मिलती है।

MRI और CT Scan

मस्तिष्क के एमआरआई (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) या सीटी (कंप्यूटेड टोमोग्राफी) स्कैन से संरचनात्मक असामान्यताओं या घावों की पहचान करने में मदद मिल सकती है जो दौरे का कारण बन सकते हैं।

ब्लड टेस्ट कब जरूरी होता है

दौरे पड़ने के अंतर्निहित कारणों, जैसे संक्रमण या चयापचय संबंधी विकारों की जांच के लिए रक्त परीक्षण किए जा सकते हैं।

मिर्गी का इलाज क्या है?

एंटी-एपिलेप्टिक दवाओं का महत्व

मिर्गी के इलाज में सबसे आम दवा एंटी-एपिलेप्टिक दवाएं हैं, और दौरे की आवृत्ति और गंभीरता को कम करना अभी भी प्राथमिक लक्ष्य है। अधिकांश लोगों का इलाज दवा से किया जा सकता है। हालांकि, अलग-अलग लोगों पर दवा की अलग-अलग खुराक का असर अलग-अलग होता है, इसलिए कुछ मामलों में परिणाम निश्चित नहीं होते।

दवा नियमित लेने के फायदे

मिर्गी के इलाज में सबसे अहम भूमिका दवाओं की होती है। डॉक्टर मरीज की उम्र, दौरे के प्रकार और उनकी गंभीरता के अनुसार दवा तय करते हैं। कुछ मामलों में दवा लंबे समय तक लेनी पड़ती है, ताकि दौरे दोबारा न हों। दवा नियमित लेने के फायदे: 

  • दौरों पर बेहतर नियंत्रण
  • अचानक दौरे का खतरा कम होना
  • जीवन की गुणवत्ता में सुधार

सर्जरी किन मामलों में जरूरी होती है

स्थितियों में, दवा काम नहीं करती और सर्जरी भी एक विकल्प है। कुछ सर्जिकल उपचार मस्तिष्क के उस हिस्से को लक्षित करते हैं जो दौरे का कारण बन रहा है, जिसमें मस्तिष्क के कुछ हिस्सों को हटाना या काटना शामिल है। बेशक, सर्जरी में जोखिम होते हैं, लेकिन यह फोकल दौरे सहित कई प्रकार की मिर्गी में सहायक हो सकती है।

डाइट थेरेपी और लाइफस्टाइल सुधार

वसा की मात्रा अधिक और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम वाले आहार को कीटोजेनिक आहार कहा जाता है। इस बात के प्रमाण मौजूद हैं कि यह दौरे को कम कर सकता है, विशेष रूप से उन बच्चों में जो दवाओं से ठीक नहीं होते।

मिर्गी के दौरे के समय क्या करें?

प्राथमिक उपचार (First Aid)

मिर्गी का दौरा अचानक पड़ सकता है, लेकिन सही समय पर सही कदम उठाने से मरीज को सुरक्षित रखा जा सकता है।

  • मरीज को सुरक्षित जगह पर लिटाएं
  • मरीज को एक करवट पर करें
  • कपड़े ढीले कर दें
  • दौरे के बाद आराम करने दें

मरीज को सुरक्षित रखने के तरीके

  • दौरे के दौरान, व्यक्ति अनियंत्रित रूप से हिल-डुल सकता है, जिससे नुकीली या कठोर वस्तुओं से टकराने पर चोट लग सकती है। आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित रूप से साफ करें और फर्नीचर या कांच की वस्तुओं जैसी किसी भी ऐसी चीज को हटा दें जिससे उन्हें चोट लग सकती है।
  • दौरे पड़ने पर अनियंत्रित हलचल के कारण व्यक्ति का सिर ज़मीन पर लग सकता है। सिर में चोट लगने से बचाने के लिए, उनके सिर के नीचे तकिया या तह किए हुए कपड़े जैसी कोई नरम चीज़ रखें।
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किन गलतियों से बचना चाहिए

  • बहुत सारे लोगों का आसपास होना तनावपूर्ण हो सकता है और हवा के संचार में बाधा डाल सकता है। उस व्यक्ति को पर्याप्त जगह दें और सुनिश्चित करें कि केवल एक या दो लोग ही उसकी मदद कर रहे हों।
  •  व्यक्ति की गतिविधियों को रोकने की कोशिश करने से नुकसान हो सकता है, जैसे मांसपेशियों में खिंचाव या हड्डियां टूटना, क्योंकि दौरे में शक्तिशाली, अनैच्छिक हरकतें शामिल होती हैं। उनके शरीर को स्वतंत्र रूप से हिलने-डुलने दें और सुनिश्चित करें कि वातावरण सुरक्षित हो।
  • प्रचलित भ्रांतियों के विपरीत, दौरे के दौरान व्यक्ति के मुंह में कभी भी कुछ न डालें, क्योंकि इससे घुटन या दांतों और जबड़े में चोट लग सकती है।

क्या मिर्गी के साथ सामान्य जीवन संभव है?

पढ़ाई और करियर पर असर

मिर्गी का पढ़ाई पर सीधा असर नहीं पड़ता, अगर दौरे नियंत्रण में हों। बच्चे और युवा नियमित दवा लेकर स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी कर सकते हैं। करियर की बात करें तो आज लगभग हर क्षेत्र में मिर्गी के मरीज काम कर रहे हैं।

शादी और पारिवारिक जीवन

मिर्गी शादी में कोई रुकावट नहीं है। सही इलाज के साथ व्यक्ति एक सामान्य वैवाहिक और पारिवारिक जीवन जी सकता है। महिलाओं के मामले में गर्भावस्था के दौरान दवाओं को लेकर डॉक्टर की निगरानी ज़रूरी होती है, ताकि मां और बच्चे दोनों सुरक्षित रहें।

ड्राइविंग और सुरक्षा से जुड़े नियम

मिर्गी के मरीजों के लिए ड्राइविंग को लेकर कुछ नियम होते हैं। अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से दौरे नहीं आए हैं और डॉक्टर अनुमति देते हैं, तो ड्राइविंग संभव हो सकती है।

मिर्गी से जुड़े आम मिथक और सच्चाई

क्या मिर्गी छूने से फैलती है?

नहीं। मिर्गी कोई छूत की बीमारी नहीं है। यह छूने, साथ बैठने, खाने-पीने या एक साथ रहने से बिल्कुल नहीं फैलती।

क्या मिर्गी मानसिक बीमारी है?

नहीं। मिर्गी मानसिक बीमारी नहीं है। यह दिमाग से जुड़ी एक शारीरिक (न्यूरोलॉजिकल) स्थिति है, जिसमें दिमाग की नसों की गतिविधि असामान्य हो जाती है। मिर्गी से ग्रस्त व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता सामान्य होती है।

क्या मिर्गी पूरी तरह ठीक नहीं होती?

हर मरीज में स्थिति अलग होती है। कई लोगों में सही इलाज और नियमित दवा से दौरे पूरी तरह बंद हो जाते हैं। कुछ मामलों में लंबे समय बाद दवाएं भी बंद की जा सकती हैं, लेकिन यह फैसला हमेशा डॉक्टर ही करते हैं।

मिर्गी को नियंत्रित रखने के उपाय

दवाइयों का सही समय पर सेवन

मिर्गी नियंत्रण में रखने के लिए दवाइयों को डॉक्टर द्वारा बताए गए समय और मात्रा में लेना बेहद ज़रूरी है। दवा छोड़ना, देर से लेना या खुद से बदलना दौरे का खतरा बढ़ा सकता है। 

नींद, तनाव और स्क्रीन टाइम का ध्यान

पूरी नींद न लेना मिर्गी के दौरे को बढ़ा सकता है। रोज़ाना पर्याप्त और नियमित नींद लेना जरूरी है। इसके साथ ही ज़्यादा तनाव, चिंता और लगातार मोबाइल या स्क्रीन पर समय बिताना भी दौरे को ट्रिगर कर सकता है।

नियमित डॉक्टर फॉलो-अप

मिर्गी का इलाज एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है, इसलिए नियमित रूप से डॉक्टर से फॉलो-अप ज़रूरी होता है। इससे दवाओं की सही मात्रा तय होती है और किसी साइड इफेक्ट या बदलाव को समय रहते संभाला जा सकता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या मिर्गी ठीक हो सकती है?

मिर्गी का इलाज कभी-कभी उपचार से संभव है या इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन यह हर मामले में अलग-अलग होता है।

कीटोजेनिक आहार, संशोधित एटकिंस आहार, या कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स उपचार (एलजीआईटी), मिर्गी से पीड़ित कुछ लोगों में दौरे को नियंत्रित करने की क्षमता प्रदर्शित करती हैं।

निष्कर्ष

मिर्गी एक ऐसी स्थिति है जिसे सही जानकारी, समय पर इलाज और नियमित देखभाल से अच्छी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। सबसे ज़रूरी बात यह है कि लक्षणों को नज़रअंदाज़ न किया जाए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज जारी रखा जाए।

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